Monday, February 9, 2015

मार्गरेट मिशेल के अंग्रेजी उपन्यास ‘Gone with the Wind’ के हिंदी अनुवाद ‘कारवां गुजर गया’ का अनुवादपरक मूल्यांकन
महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय,वर्धा के अनुवाद एवं निर्वाचन विद्यापीठ के अनुवाद प्रौद्योगिकी विभाग में पी-एच.डी . अनुवाद प्रौद्योगिकी उपाधि हेतु प्रस्तुत
शोध विषय प्रस्तुतीकरण 

प्रस्तावना
आज बहुभाषिकता के इस दौर में अनुवाद एक एक ऐसा माध्यम है जिसके द्वारा एक भाषा-भाषी अन्य भाषाओं में लिखित पाठ्य सामग्री को अपनी भाषा में प्राप्त कर सकता है|  हम जानते हैं कि प्रत्येक देश की अपनी एक अलग भाषा, संस्कृति, रीति-रिवाज आदि होते हैं जोकि किसी अन्य देश से भिन्न होते हैं| परंतु यदि हमें किसी देश के बारे में जानना हैं तो हमें उस देश की भाषा को जानना होगा जोकि एक अत्यंत कठिन कार्य है| अत: ऐसी स्थिति में अनुवाद एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में हमारी सहायता करता है| हम अनुवाद के माध्यम से किसी भाषा में लिखित पाठ्य सामग्री को अपनी भाषा में प्राप्त कर सकते हैं| इस अनूदित पाठ्य सामग्री के द्वारा हम अपने ज्ञान के सभी क्षेत्रों में असीमित वृद्धि कर सकते है| परंतु क्या यह अनुवाद हमें वही संदेश प्राप्त करा रहा है जो वह अपने मूल पाठ में प्रस्तुत कर रहा है? क्या अनुवादक उसी संदेश को लक्ष्य पाठ में लाने में पूरी तरह से सफल हुआ है या नहीं? ये कुछ ऐसे प्रश्न हैं जो पाठक के सामने अनूदित कृति को पढ़कर प्रस्तुत होते हैं| इन सभी प्रश्नों के हल के लिए अनुवाद के मूल्यांकन की आवश्यकता महसूस की जाती है, जिसके माध्यम से मूल्यांकनकर्ता अनुवाद की गुणवत्ता की जांच करता है|
अनुवाद मूल्यांकन के लिए अंग्रेजी में दो शब्द प्रचलित हैं‍‍‍‌‍‌‍‌:Translation Quality Assessment और Translation Evaluation.वास्तव में दोनों का संबंध अनुवाद की गुणवत्ता की जांच से है| मूल्यांकन द्वारा यह निर्णय किया जाता है कि अनूदित पाठ मूल पाठ के स्तर का है अथवा नहीं, उसके सहपाठ के रूप में प्रयुक्त हो सकता है अथवा नहीं| साथ ही यह भी पता लगाया जाता है कि मूल पाठ से अलग रखे जाने पर अनूदित पाठ उस सम्पूर्ण संदेश और उसमें निहित आशय का वहन करता है अथवा नहीं जो मूल पाठ में निहित है| अंगेजी में प्रयुक्त Assessment तथा Evaluation के लिए हिंदी में एक ही पर्याय मूल्यांकन प्रयुक्त होता है जबकि दोनों में पर्याप्त अंतर है|
  Quality Assessment मुख्यतः सूचनापरक पाठ का होता है| इसमें सार्वजानिक सूचना के लिए सार्वजानिक स्थलों पर लगे बोर्डों पर दी गई सूचना, रेलवे प्लेटफार्मों, बस अड्डे, हवाई अड्डों आदि पर यात्रियों के लिए उपयोगी सूचनाएं और यातायात संबंधी जानकारी आदि हो सकती है| व्यापक वर्ग के उपयोग के लिए दी गई वे सभी सूचनाएं जो पढ़कर तात्कालिक समझी और उपयोग में लाई जाने वाली हों ऐसे पाठों के अंतर्गत आती हैं| इन सूचनाओं का अनुवाद विभिन्न भाषाओँ के आम लोगों को तुरंत संप्रेषण की अपेक्षा रखता है| इस तरह के अनुवाद का मूल्यांकन संदेश के सही-सही संप्रेषण की दृष्टि से किया जाता है|
  Translation Evaluation में भी मूलरूप से अनुवाद की गुणवत्ता की ही जांच की जाती है लेकिन इस शब्द का प्रयोग विविध विषयों के पाठों और कृतियों के अनुवादों की जांच के लिए प्रयुक्त होता है| इसमें सूचनापरक और सार्वजानिक दोनों के संदर्भ में प्रयुक्त गुणवत्ता की जांच के साथ-साथ अनुवाद के महत्व की स्थापना भी शामिल होती है| यदि मूल्यांकन किसी साहित्यिक रचना का किया जा रहा है तो यह पता लगाया जाता है कि मूल कृति का संदेश अनुवाद में किस हद तक वहन हुआ है| अनुवाद की प्रक्रिया में अनुवादक ने क्या छोड़ा है और क्या जोड़ा है? क्या कृतिकार के संदेश के अतिरक्त कोई और संदेश भी अनुवाद वहन कर रहा है? यदि हाँ, तो वह क्या है? अनुवाद की पुनः सृजन प्रक्रिया के दौरान क्या भाषा और भाव के स्तर पर कोई नूतन उदभावना हुई है? यदि हुई है, तो वह किस करण हुई है अनुवादक की अपनी मनोभूमिका के कारण अथवा रचना और अनुवाद के बीच देश-काल के अंतराल के कारण|
मूल्यांकन की प्रमुख पद्धतियाँ
1.पुनःअनुवाद आधारित मूल्यांकन
2.अनुक्रिया आधारित मूल्यांकन
  इसी पद्धति के आधार पर नाईडा ने अनुवाद मूल्यांकन के तीन आधार बताए हैं:-
2.1.संप्रेषण प्रक्रिया में सहज प्रभाव: पाठक या संग्राहक कम से कम श्रम में पाठ का अधिकतम अर्थ ग्रहण करता है तो वह अच्छा अनुवाद है|
2.2.कथ्य का बोधन: यदि मूल पाठ में निहित सामाजिक, सांस्कृतिक और सौन्दर्यपरक कथ्यों का बोधन अनूदित पाठ में सहज रूप से होता है तो वह भी अच्छा अनुवाद माना जाएगा|
2.3.अनुक्रिया की समतुल्यता: पाठक मूल पाठ के प्रति जिस प्रकार की अपनी अनुक्रिया व्यक्त करता है बिल्कुल उसी प्रकार की अनुक्रिया अनूदित पाठ के प्रति भी व्यक्त करता है तो अनुवाद सफल माना जा सकता है|
3.वाचन परीक्षण
‘कारवां गुजर गया’ मार्गरेट मिशेल के अंग्रेजी उपन्यास ‘Gone with the Wind’ का हिंदी अनुवाद है| 1936 में प्रकाशित Gone with the Wind को विश्व साहित्य का एक सफलतम उपन्यास माना जाता है| अमेरिका के गृहयुद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित यह उपन्यास अपने कथानक और चरित्र-चित्रण तथा एक अनूठी और असाधारण प्रेम-कथा की दृष्टि से बेजोड़ माना जाता है| यह प्रेम-कथा एक ऐसे युद्ध की पृष्ठभूमि में चलती है, जिसकी भयंकर ज्वाला ने जाने कितने बसे-बसाए शहरों और फलते-फूलते परिवारों को अपनी चपेट में ले लिया! जाने कितने कारवां उजड गए! जाने कितने परिवार बिछड गए! युद्ध के बाद मानो उन सबकी पूरी दुनिया ही बदल गई! इस उपन्यास को आधुनिक अमेरिका के निर्माण की महागाथा के रूप में संपूर्ण विश्व में पढ़ा गया| 1936 में अपने प्रकाशन के तुरंत बाद इसने बिक्री के सभी रेकॉर्ड तोड़ दिए| छह महीनों के भीतर इस उपन्यास की दस लाख प्रतियां बिक चुकी थी| जिसमें एक ही दिन में पचास हजार प्रतियों की बिक्री का कीर्तिमान भी इसी उपन्यास के नाम दर्ज है| अगले तीस वर्षों तक यह कृति लोकप्रियता के शिखर पर इसी तरह डटी रही| इस पूरी अवधि में न सिर्फ इसकी सवा करोड़ प्रतियां बिक चुकी थी, बल्कि पच्चीस से भी अधिक भाषाओँ में इसका अनुवाद हों चूका था| 1937 में इस उपन्यास को पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित किया गया तथा 1939 में इसी नाम से इस पर एक फिल्म भी बनी, जिसे हॉलीवुड सिनेमा के इतिहास की सर्वाधिक सफल फिल्म माना जाता है| हिंदी भाषा में इसका अनुवाद युगांक धीर द्वारा ‘कारवां गुजर गया’ नाम से किया गया, जिसका पहला संस्करण 2006 में संवाद प्रकाशन द्वारा प्रकाशित किया गया|
  इस उपन्यास की इसी लोकप्रियता के कारण मेरे द्वारा अपने पी-एच.डी. शोध कार्य के लिए इसके अनुवादपरक मूल्यांकन को शोध विषय के रूप में चयनित किया गया है| 
प्राक्कल्पना
प्रस्तुत शोध विषय की प्राक्कल्पना के रूप में यह कहा जा सकता है कि कोई भी अनुवाद मूल पाठ के समान नहीं हों सकता है| अनुवाद करते समय उसमें कहीं बहुत सी चीजें छूट जाती हैं तो कुछ नई चीजें भी जुड़ जाती हैं| इसलिए विशेषज्ञों द्वारा यह कहा गया है कि अनुवाद समतुल्य हो सकता है समान नहीं| ऐसी ही बहुत सी कमियां उपरोक्त उपन्यास के अनुवाद के संदर्भ में भी रही होगी| अत: अनुवाद मूल्यांकन के द्वारा उन सभी कमियों को प्रस्तुत करने का प्रयास किया जाएगा| 
शोध का उद्देश्य
प्रस्तुत शोध कार्य को करने का  मख्य उद्देश्य मूल तथा अनूदित उपन्यास का अर्थ तथा शैली की दृष्टि से तुलनात्मक अध्ययन करके अनुवादक की चूकों को सामने लाना है| अनुवाद अर्थ तथा शैली की दृष्टि से पाठकों पर कितना प्रभाव छोड़ पाया है तथा संप्रेषणीयता तथा ग्राह्यता की दृष्टि से अनुवादक कहां तक अपने अनुवाद के साथ न्याय कर पाया है? क्या अनुवादक लेखक की शैली को अनुवाद में ला पाया है अथवा नहीं? इन सभी बिंदुओं को अनुवाद मूल्यांकन के दौरान ज्ञात करने का प्रयास किया जाएगा|
शोध-प्रविधि
  प्रस्तुत शोध कार्य के लिए तुलनात्मक एवं विश्लेषणात्मक शोध-प्रविधि का प्रयोग किया जाएगा| 
अध्यायीकरण
प्रस्तुत शोध विषय को निम्नलिखित अध्यायों में पूर्ण किए जाने का प्रयास किया जाएगा:-
प्रथम अध्याय : अनुवाद : सिद्धांत और प्रक्रिया  
  1.1.अनुवाद की अवधारणा, व्युत्पत्ति एवं अर्थ   
  1.2.अनुवाद स्वरुप और प्रक्रिया
  1.3.अनुवाद की समस्याएं और सीमाएं
द्वितीय अध्याय : अनुवाद मूल्यांकन : सैद्धांतिक पक्ष 
  2.1.अनुवाद मूल्यांकन की आवश्यकता और उपयोगिता   
  2.2.अनुवाद मूल्यांकन की पद्धतियाँ 
  2.3.साहित्यिक अनुवाद और मूल्यांकन
  2.4.अनुवाद मूल्यांकन की समस्याएं और सीमाएं  
तृतीय अध्याय : लेखक और अनुवादक परिचय तथा मूल तथा अनूदित उपन्यास 
  3.1.मार्गरेट मिशेल का परिचय 
  3.2.युगांक धीर का परिचय
  3.3.मूल उपन्यास का देशकाल
  3.4.मूल उपन्यास तथा अनूदित उपन्यास की भाषा शैली   
चतुर्थ : अनुवादपरक मूल्यांकन
  4.1.शब्द के स्तर पर मूल्यांकन
  4.2.वाक्य के स्तर पर मूल्यांकन
  4.3.प्रोक्ति के स्तर पर मूल्यांकन
पंचम अध्याय : निष्कर्ष 
संदर्भ-ग्रंथ सूची
1.धीर,युगांक,(2006), कारवां गुजर गया(अनुवाद), मेरठ, संवाद प्रकाशन
2.गोस्वामी,कृष्ण कुमार,(2008), अनुवाद विज्ञान की भूमिका, नई दिल्ली, राजकमल प्रकाशन
3.तिवारी,भोलानाथ,(2007), अनुवाद विज्ञान, नई दिल्ली, किताबघर प्रकाशन
4.गोपीनाथन,जी.,(2001), अनुवाद: सिद्धांत और प्रयोग, इलाहाबाद, लोकभारती प्रकाशन
5.भाटिया,कैलाशचन्द्र,(2004), अनुवाद:प्रक्रिया और स्वरुप, नई दिल्ली, तक्षशिला प्रकाशन
6.कुमार,सुरेश,(2005), अनुवाद सिद्धांत की रुपरेखा, नई दिल्ली, वाणी प्रकाशन
7.Mitchell,M. Gone with the Wind http://gutenberg.net.au/ebooks02/0200161p.pdf  
                                                       शोधार्थी                                        
                                                                                         वासुदेव
                                                                          पी-एच॰डी॰अनुवाद प्रौद्योगिकी  
                                                                                                                             Email:-vasupawar31@gmail.com                                                                                                                                             

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