एस. एम. एस. की भाषा
का भाषिक विश्लेषण
विजय करण
एम .फिल अनुवाद प्रौद्योगिकी
संपर्क:8574768394
भूमिका -
उत्तर आधुनिक समय में समाज
के प्रत्येक क्षेत्र में बदलाव दिखाई पड़ रहा है ; कला,संस्कृति, विज्ञान आदि
क्षेत्रों में बदलाव आ रहे हैं जो आपरिहार्य हैं,और भाषा भी इससे अछूती नहीं है । मनुष्य ने शुरूआती समय से ही अपनी सुविधा के लिए नई नई चीजों का निर्माण
करता चला आ रहा है । किंतु समय बिताता गया और एक समय ऐसा आया कि जब
मनुष्य को लगने लगा कि अब करने के लिए क्या है? लेकिन मनुष्य की नया करने की प्रकृति आज भी बनी हुई
है, इसका उदाहरण है यह
है कि आज वह reconstruction के काम में लगा है,खुद की बनाई गई
चीजों को वह तोड़ मरोड़ रहा है और दुनिया के नएं रूप में सामने रख रहा है ।
कुछ यही स्थिति हम भाषा के क्षेत्र में देख
रहें हैं, जिसमें पहले
व्याकरण के नियम बनाए गए थे जिसके अंतर्गत भाषा को सुविधापूर्ण बनाया गया था किंतु
नोम चाम्स्की ने इन सभी को तोड़ते हुए नए विचार प्रदान किए एवं एक नई धारा प्रदान की । इसी संदर्भ में आज हम एस. एम. एस. की बात करें तो एस. एम. एस. ने आज एक नई भाषा का
निर्माण किया है। जिसका कोई व्याकरण उपलब्ध नहीं है, न ही किसी
शब्द कोश में किसी शब्द का अर्थ उपलब्ध है
और न ही वह शब्द मिलते है ,केवल
उपयोगकर्ता को ही एस. एम. एस. की भाषा समझ में आती है ।
यह समाज में नई संस्कृति का निर्माण करती है, साथ ही एस. एम.
एस. की भाषा अपने ही समूहों तक मर्यादित होती है जो अन्य समूहों से दूरी बनाए रखने की लगातार कोशिश
करती है । किसी भी शब्द को बनाने के लिए
संकेतक (signifier)एवं संकेतित (signification)की जरुरत होती है जो
क्षेत्रीय स्तर पर अलग अलग होती है वैसे ही शब्दों के उच्चारण के बाद मनुष्य के
मस्तिष्क में बनने वाले चित्र अलग अलग होते हैं। उदाहरण के लिए हिंदी के जानने
वालों के बीच आकार आलू के बजाय बटाटा (यह
शब्द आलू के लिए मराठी में उपयोग किया
जाता है ) शब्द का उपयोग करें तो वह मराठी भाषा को न जानने के करण उस समूह
के मस्तिष्क में कोई आकृति नहीं बनेगी यह एक तरह से अजनबियत को उत्पन्न करता है
। किंतु अब हम देखते है कि आज मोबाईल क्रांति के पश्चात सम्प्रेषण के क्षेत्र में बदलाव आया है न केवल
वाचिक बल्कि लिखित रूप (एस.एम.एस.) भी तेजी से व्यवहार में आया है । भाषा के सारे नियमों एंव व्याकरण को तोड़ दिया है ।
जो हर रोज नए शब्द गढें जाते हैं
। और आश्चर्य जनक बात यह की इसका कोई
रचयिता नहीं है । इसे स्वयं उपयोगकर्ता
द्वारा बनाया जाता है। जो अपने उपयोग के
लिए ही है। इस संदर्भ में न जाने क्यों एस.एम एस. की भाषा
मुझे पूरी तरह लोकतान्त्रिक लगने लगती है
। क्योंकि यही वह भाषा है जो लोगों ने लोगों द्वारा एवं लोगों के
लिए है अन्यथा आज तक हम देखते है की हर क्षेत्र में विशेषीकरण (specialization)होने
के कारण उस क्षेत्र के विद्वान, विशेषज्ञ एवं बुद्धिजीवी अपने विचारों एवं शोध
द्वारा प्राप्त तथ्यों को लोगों पर थोपते
रहते हैं , एक एस.एम.एस. की भाषा एक ऐसा क्षेत्र है, जो पूरी तरह आम लोगों द्वारा
बनाया गया है जिसका संचालन पूरी तरह आज भी
उनके हाथों में है ।
शायद आने वाला कल याइसके विशेषज्ञ
इसका पेटेंट भी अपने नाम करवाएं किंतु आज वर्तमान में एस.एम.एस. की भाषा पूरी तरह
स्वतंत्रा को बरक़रार रखते हुए लोगों में नवनिर्मिती की सोच को बढ़ाने का कम कर रही है जो एक सभ्य
समाज में अच्छा परिवर्तन माना जाएगा ।
एस. एम. एस. एक नई
संप्रेषण की प्रणाली है । यह हमें
मोबाईल एवं पेजर से जोड़ता है। यह सरल मोबाईल एक संचार प्रोटोकाल (communication, protocol) मोबाईल टेलीफोन उपकरणों के बीच लघु सन्देशों का आदान
–प्रदान करने की अनुमति प्रदान करता है ।
संप्रेषण एक सहज मानवीय प्रक्रिया है जिसमें एक से अधिक व्यक्ति या दो
व्यक्तियों (वक्ता एवं श्रोता ) में रहते हुए किसी सूचना या विचार का आदान –प्रदान करते हैं ।
इसमें भाषा आधारभूत साधन का कार्य करती है वक्ता द्वारा सूचना या विचार को
भाषिक रूपों (linguistics forms)में बोलकर या लिखकर कोड़ीकृत किया जाता है और श्रोता उन उच्चरित या लिखित रूपों को सुनकर या पढ़कर सूचना
या विचार को कोड रूप से डिकोड करता है। एस.एम.एस. सीमित शब्दों में संक्षिप्त सन्देश
भेजने की मोबाईल कंपनियों द्वारा प्रदत्त
सुविधा है । इसे हिंदी में ‘सरल मोबाईल सन्देश सेवा’ कहा गया है किंतु हमें
‘संक्षिप्त सन्देश सुविधा’ हिंदी रूपांतरण अधिक सटीक जान पड़ता है, इसमें मोबाईल कंपनियों द्वारा अलग–अलग शब्द
सीमा देते हुए चार्ज के रूप में कुछ पैसा लिया जाता है इसमें दैनिक साप्ताहिक एवं मासिक एस.एम.एस. जैसी सुविधाएँ
भी देखी जा सकती है ।
एस. एम. एस. : परिचय –
एस.
एम. एस. एक नई संप्रेषण
की प्रणाली है।यह हमें मोबाइल एवं पेजर से जोड़ता है। यह सरल मोबाइल एक संचार प्रोटोकाल
(communication, protocol) मोबाइल
टेलीफो नई उपकरणों के बीच लघु सन्देशों का अदान –प्रदान करने की अनुमित प्रदान करता है।संप्रेषण एक सहज मानवीय
प्रक्रिया है जिसमें एक से अधिक व्यक्ति या दो व्यक्तियों (वक्ता एवं
श्रोता ) में रहते हुए किसी सूचना या विचार का अदान –प्रदान करते हैं।
सामान्यतःप्रत्येक व्यक्ति
एस.एम.एस. अपनी भाषा में ही लिखता है
किन्तु रोमन लिपि जानने वाले लोगों द्वारा प्रायःएस.एम.एस. रोमन लिपि में ही लिखे जाते है। रोमनलिपि के वणों (letters)के सामान्य उच्चारण (वर्णमाला alphabet में ) और शब्दों में होने वाले उच्चारण के बीच अंतर से हम सभी पररिचत हैं ; जैसे :
वर्ण वर्णमाला
में शब्दों में उदहारण-
उच्चारण उच्चारण
A ए अ,एDhaka=अ, Abstract=ऐ
B बी बlab=ब
C सी क, सcement= स cat=कआदद।
इसी प्रकार अन्य सभी वर्णों को भी देखा जा सकता है। इससे अतिरिक्त प्रत्येक वर्ण
के (वर्णमाला
में प्राप्त ) सामान्य उच्चारणात्मक स्वरूप के समान कुछ शब्दों का उच्चारण भी होता है। जैसे
:
वर्ण वर्णमाला
में शब्द
उच्चारण
A ऐ a=एक
B बी be=hona, bee= मधुमक्खी
C सी see= देखना,
sea=समुद्र
आदि .......
इसी प्रकार की स्थिति कुछ सांखिकीय वर्णों (numeric characters) में भी पाई जाती ; जैसे 2=two,to,too
.आदि
एस.एम.एस लेखन में संक्षिप्तता की महत्ता को देखते हुए रोमन वर्णों की इस
विशेषता का लाभ उठाते हुए वर्तमान SMS लेखन
की जो नई पद्धति विकसित हुई है उसमें सामान्य लेखन के नियम धरे के धरे रह गए है
। अब चूँकि भाषिक रूप (या सम्पूर्णतः भाषा ) संप्रेषण का
मध्यम है और एस.एम.एस. द्वारा हमारे समाज में व्यापक स्तर पर संप्रेषण हो रहा है अतः इस नवीन संप्रेषणात्मक विधा की
संरचना पर भाषा वैज्ञानिक दृष्टि से विचार कार एक नई विश्लेषण प्रणाली का विकास
आवश्यक हो जाता है ।
एस. एम. एस. : भारतीय परिदृश्य: -
भारत एक विविधता
में अनेकता वाला देश है जहाँ पर बहुत सारी भाषाएँ बोली जाती है जैसे इस उक्ति में
कहा गया है – कोस –कोस
पर पानी बदले चार कोस पर बानी ।
इस तरह आज के आधुनिक समय में उससे भी ज्यादा परिवर्तन दिखता
है । जिसमें अंग्रेजी भारतीय भाषाओं पर
हावी होने लगी है, हिंदी का हिंग्लिश हो रहा है ।
प्रौद्योगिकी क्रांति के पश्चात
ज्ञान का महत्व बढ़ गया और यह ज्ञान मात्र ज्ञान न रहकर परिचालन का ज्ञान है
जो यह जानता है कि वह ज्ञानी माना जाने
लगा है ।
इस तरह से आने वाले बदलाओं
का महत्वपूर्ण कारण मोबाइल है जिसमें संचारक्रांति के बाद महत्वपूर्ण बदलाव
आया है ।
आज अंग्रेजी का उपयोग मराठी हिंदी पंजाबी आदि भाषाओं में लगातार बढ़ता जा
रहा है एवं अंग्रेजी में संक्षिप्तिकरण के
कारण आने वाले समय के लिए खतरा बनता दिखाई पड़ रहा है।
जहाँ एस.एम.एस. की बात करें तो लगभग मान्यता प्राप्त सभी भाषाओं में एस.एम.एस.
लिखे जा रहे कुछ भाषाओं के एस.एम.एस.निम्न प्रकार
देखे जा सकते है ।
हिंदी एस.एम.एस.
मराठी भाषा में एस. एम.एस.-
भोजपुरी एस.एम.एस. :-
१.
रूप के
आधार पर
·
पाठ के रूप में
·
कोडीकृत
रूप
·
मल्टीमीडिया
रूप
२.
भाषा
के आधार पर
·
एक भाषिक एस.एम.एस.:
·
हिंदी एस.एम्.एस.:
·
अंग्रेजी
एस.एम.एस.
·
प्रादेशिक
भाषा में एस.एम.एस.:
·
द्विभाषिक
एस.एम.एस.:
·
हिंदी
और अंग्रेजी एस.एम.एस.
·
हिंदी और प्रादेशिक भाषा में एस.एम.एस
·
बहुभाषिक एस एम.एस.
सामाजिक प्रयोग के आधार पर-
सामाजिक प्रयोगों के आधार पर अगर देखा जाये तो
बहुत सारे एस.एम.एस.का प्रयोग किया जाता
है। अगर एन एस.एम.एस. की गणना की
जाए तो लगभग सैकड़े की गिनती को पार
कर सकते हैं । जिसमें जन्म से लेकर
मरणोपरांत के एस.एम.एस. का प्रयोग होता है ,तथा तिथि से लेकर बड़े त्योहारों तक
एस.एम.एस. शामिल है तथा कुछ ऐसे भी एस.एम.एस.प्रयोग किया जाता है जो एक सभ्य समाज में नहीं स्वीकार करते
हैं; जैसे – adault sms का युवाओं में भरपूर प्रयोग होता है। मैंने जो कुछ मोबाइल के एस.एम.एस. का विश्लेषण किया
है जिनमें शुभ –प्रभात शुभ रात्रि, good morning से लेकर good night एवं शुभ कामनाओं के sms ज्यादा प्राप्त हुए है ।
इनके आलावा बहुत सारे एस.एम.एस. है जो निम्नलिखित है –
Love sms- Chahat Teri
Pehchan He Meri…
Mahobbat Teri Shaan He Meri…
Hoke Juda Tujse Kya Reh Paunga…
Tu To Aakhir Jaan he Meri…
sad sms- Meri Saansein Sirf Tere Hi Naam Par Chalti Hai,
Meri Aankhein Sirf Tujhe Hi Dekhna Chahti Hai,
Yun To Aur Bhi Dost Kai Hai Mere,
Na Jane Kyu Dil Ko Sirf Teri Hi Yaad Aati Hai
friendship sms - Kuch saalo baad najane kya sama hoga,
Najane kaun dost kaha hoga,
Phir milna hua toh milenge yaadon mein,
Jaise sukhe gulab milte hai kitabon mein
इस प्रकार से बहुत से ऐसे एस.एम.एस.है जिनको आप निम्न प्रकार से देख सकते हैं:-
Mahobbat Teri Shaan He Meri…
Hoke Juda Tujse Kya Reh Paunga…
Tu To Aakhir Jaan he Meri…
sad sms- Meri Saansein Sirf Tere Hi Naam Par Chalti Hai,
Meri Aankhein Sirf Tujhe Hi Dekhna Chahti Hai,
Yun To Aur Bhi Dost Kai Hai Mere,
Na Jane Kyu Dil Ko Sirf Teri Hi Yaad Aati Hai
friendship sms - Kuch saalo baad najane kya sama hoga,
Najane kaun dost kaha hoga,
Phir milna hua toh milenge yaadon mein,
Jaise sukhe gulab milte hai kitabon mein
इस प्रकार से बहुत से ऐसे एस.एम.एस.है जिनको आप निम्न प्रकार से देख सकते हैं:-
एस.
एम. एस. लेखन : संक्षिप्त शब्द निर्माण:
आधुनिक समय में इतनी तेजी आई है की मनुष्य हर क्षेत्र में shortcut से काम चलाना चाहता है चाहे वह कोई भी क्षेत्र
हो shortcut अपनाने से नहीं चुकता है । अब यही पर ले लिया जाए की एस.एम.एस.खुद अपने आप
में संक्षिप्त रूप में होता है । एस.एम.एस. में शब्द अपने सामान्य रूप में नहीं
लिखे जाते बल्कि उनका संक्षिप्तीकरण कर दिया जाता है । जैसे – 2da= today, gr8= great , 4get= forget,b4=
before, ilu = I love you, c = see, sea. Knpr = Kanpur, alld=allahabad,
hdbd=hyderabaad, barabar= ‘=’, gaya= gya इत्यादि ।
एस.एम.एस लेखन में शब्दों के संक्षिप्तिकरण में निम्नलिखित
प्रक्रियाएँ होती हैं
क. प्रतिस्थापन (replacement): इसे निम्नलिखित शीर्षकों के अंतर्गत समझा जा सकता है
१.
शब्द के लिए वर्ण (latter for
word) रोमन लिपि में अनेक
वर्णों (मुख्यतः a,c,e,r,v,t,y,f,u,d,g,x,l,) के उच्चारण की तरह कुछ शब्दों का उच्चारण भी होता है । अतः इन शब्दों के आने पर इनकी जगह उच्चारण
साम्य वाले वर्णों को ही रख दिया जाता है जैसे : where are you
= where r u?
See you again = c
u again.
इस तरह के
शब्द और वर्णों की समानता हिंदी में भी
कुछ हद तक पाई जाती है । अतः रोमन में
लिखते समय इस प्रकार के शब्दों के आने पर केवल उन वर्णों को ही रख दिया जाता है
। जैसे – वह भी आया =wah v aaya
२.
शब्द के लिए संख्या (number for
word) कुछ अंको क उच्चारण भी
शब्दों के सामान होता है । उन शब्दों के
आने पर शब्द की जगह (अंक या संख्या) रख
दिया जाता है।
I got eight rupees. = igot 8 rupees.
He come too late.= he come 2 late
हिंदी में भी कुछ ऐसे प्रयोग मिल जाते हैं जैसे :
Tu
kyon nhi aya.= 2 kyo nhi aya.
३.
शब्द के लिए चिन्ह (symbol for
word): कुछ शब्दों के लिए एस.एम.एस. में शब्द की
जगह पर उनके लिए निर्धारित चिन्हों का प्रयोग किया जाता है ।
जैसे : Ram and Shyam are going = Ram & Shyam r
going.
हिंदी में
भी इस प्रकार के प्रगोग देखे जा सकते हैं
।
जैसे – Ram aur rohit ne hisaab barabar kiya= Ram aur
rohit ne hisaab = kiya
ख. वर्ण विलोपन (letter Removing): एस.एम.एस. निर्माण के
दौरान शब्दों क संक्षिप्तीकरण करते हुए ध्वन्यात्मक प्रखरता और भेद के आधार पर गौण
वर्णों को हटाकर केवल मुख्य वर्णों (main/key letters) को रहने दिया जाता है अथवा उनके आरम्भ , मध्य या अंत से
कुछ वर्णों को हटाकर उनकी जगह ध्वन्यात्मक साम्य वाली संख्या या चिन्ह को रख दिया
जाता है ताकी शब्द संप्रेषणीय रहे इस
प्रक्रिया को वर्ण विलोपन कहते हुए इसके दो प्रकार की ये जा सकते हैं :
१.
गौण वर्ण विलोपन (removing
miner letter): शब्दों
को छोटा करने के लिए प्रायः उन वर्णों को शब्द से हटा दिया जाता है जिनके बिना भी
बचे वर्णों के मेल से निर्मित शब्द द्वारा अर्थ प्राप्त हो जाए । जैसे : he went to Hyderabad and Bangalore.= he went
hdbd & bnglr.
हिंदी
शब्दों के साथ भी यह प्रक्रिया देखी जा सकती है ।
Vah
Hyderabad aur Bangalore gaya.= vah hdbd & bnglr gya.
जब
शब्दों का संक्षिप्तिकरण किया जाता
है तो ज्यादातर स्वर को ही विलोपित किया
जाता है चाहे वह अंग्रेजी का शब्द
को हो या फिर हिंदी के शब्द हों । जैसे – Hyderabad = hdbd, gaya में ‘a’ को तथा Bangalore= bnglr में ‘a,o,e’ इत्यादि वर्णों को विलोपित किया गया है ।
२.
वर्णों की जगह संख्या का प्रयोग : एस.एम.एस. के लेखन में कुछ शब्दों के निर्माण
में उनके मध्य में या आरम्भ में तथा अंत में भी कुछ शब्दों को निकलकर उनकी जगह
उच्चारण में सामान संख्या को (या अंक) को रख दिया जाता है : जैसे – go there before night= go there be4 ni8.
I saw
fourteen boys= I saw 4teen boys.
हिंदी में
भी ऐसे शब्दों का निर्माण होता है ।
Maine
charminaar dekha .= maine 4minaar dekha
Maine subh
samachar part padha= maine sama4 patra padha .
ग.
संक्षिप्त रूप (Abbreviation) सामान्य ,प्रचलित और सर्वाधिक आवृति वाले शब्दों के
सक्षिप्त रूप (Abbreviation)
Good morning = gm
Take care = tc
आदि ।
किंतु एस.एम.एस.लेखन में की ए जाने वाले
संक्षिप्तीकरण में बड़े अक्षर (capital letter) का
प्रयोग तथा उसके साथ डॉट (.) का प्रयोग (जैसे : G.M.) आदि के नियमों का पालन नहीं किया जाता ।
एस.एम.एस. लेखन में शब्द संखिप्तिकरण में
सामान्यतः प्रयुक्त होने वाले अंक , प्रतीक
तथा संक्षिप्त रूप और इनके द्वारा संकेतित सामान्य शब्द (या विस्तार) इनकी
सूची निम्न प्रकार है :
हिंदी शब्दों का शब्द संक्षिप्त :
S= से
B= भी
H= है
Dr = डर
Tavir =
तस्वीर
Prm = प्रेम
Kr = कर
Mn = मन
1,7= एक
साथ
Mbil= मोबाइल
Dl = दिल
Rni = रानी
Chnd= चाँद
Stre = सितारे
Sbh =
शुभ
मराठी में शब्द संक्षिप्त:-
1kch=
एकाचे
Tr = तर
Vr = वर
1kte = एकटे
J1= जेवण
A= ये
T= ती
Jat = जात
3 ने = तीने
8,1=
आठवण
2= तू
1da= एकदा
Kute= कुठे
Ami= आम्ही
Ete= इथे
अंग्रेजी शब्द संक्षिप्त :-
1dRfl - wonderful
2 - to/too/two
2dA - today
2moro - tomorrow
2nite - to night
GR8 - "Great"
4 - for
2dA - today
2moro - tomorrow
2nite - to night
GR8 - "Great"
4 - for
व्याकरण के नियमों का अतिक्रमण:-
जब किसी भाषा की संरचना में कोई परिवर्तन हो या फिर शब्द
निर्माण की प्रकिया हो, इन सारे परिवर्तनों में व्याकरण की महत्वपूर्ण भूमिका होती
है । यह परिवर्तन उसी भाषा के व्याकरण के
अनुसार होता है । यदि भाषा के शब्द
निर्माण की प्रक्रिया पर विचार करें तो भाषा में शब्द निर्माण की प्रक्रिया कई ढंग
से होती है । कभी उपसर्ग लगाकर, कभी
प्रत्यय लगाकर, कभी दो शब्दों के मेल से आदि कई प्रकार से शब्द का निर्माण हम कर
सकते हैं। हिन्दी भाषा की शब्द संरचना की
प्रकिया कुछ इस प्रकार से देखी जा सकती है :-
धातु + प्रत्यय =
शब्द
धातु + उपसर्ग =
शब्द
धातु + मध्य
प्रत्यय = शब्द
हिन्दी भाषा की
शब्द निर्माण प्रक्रिया में –
पढ़ + आई = पढ़ाई
प्र + भाव = प्रभाव
इसी प्रकार अन्य भाषाओँ में भी शब्दों का
निर्माण किया जाता है जबकि एस.एम.एस. की
भाषा इस प्रकार से शब्दों का निर्माण नहीं
किया जाता बल्कि एस.एम.एस. भाषा में कुछ विशेष प्रकार से शब्दों का निर्माण
किया जाता है । शब्दों को संक्षिप्त करके
नए शब्द का निर्माण किया जाता है या अंकों के संयोग से और विशेष सिम्बलों से
शब्दों का निर्माण होता है; जैसे - S= से , Ami= आम्ही
, Ete= इथे
,8,1=
आठवण , 1,7= एक
साथ
इन शब्दों के निर्माण में न कोई व्याकरण है, न
ही कोई व्याकरणिक नियम लागू होता है ।
किसी भी भाषा के इस तरह से शब्दों का निर्माण एवं शब्द प्रयोग नहीं होता है
जिस प्रकार एस.एम.एस. में प्रयोग एवं निर्माण किया जाता है। इस एस.एम.एस. प्रणाली ऐसे शब्दों का निर्माण
नहीं होता है जिससे नए अर्थ का बोध हो जबकि व्याकरण सम्मत तैयार शब्दों से एक नए
अर्थ की प्रतीति होती है ।
संदर्भ सूची:-
1. Adbola Otemuyiwa, abstract ,The
Emergence of new linguistic features in SMS text messages
2. Beal, Vangie (2011)Text Messaging
and Online Chat Abbreviations, Webopedia
3. Bhattacharya dr. Monali, abstract
unveiling the : an analysis of linguistic competence v/s linguistic performance
of the general variety of English in India today-the oust for a paradigmatic
model
4. Christian Viard –Gaudin, Abstract,
language models for handwritten short message services
5. Prasad, Dhanji
& Bharati, Ranjeet, Research Paper, SMS: New Mode of Communication and its
Linguistic Aspect.
6. Rafi, Muhammad
Shaban : SMS Text Analysis: Language, Gender and Current Practices
7. Sabreena ahmed , abstract , The use
of SMS and Language transformation Bangladesh
8. T R O S B Y , F I N N : SMS, the
strange duckling of GSM
वेबसाइट :
en.wikipedia.org/wiki/SMS
http://www.txt2nite.com/forum/viewtopic.php?t=136
http://en.wikipedia.org/wiki/SMS
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