Tuesday, February 10, 2015

हैमलेट के अनुवाद का समीक्षात्मक परिचय

हैमलेट के अनुवाद का समीक्षात्मक परिचय
                                    शावेज ख़ान

जी॰बी हैरिसन शेक्सपियर के संदर्भ में कहते हैं कि
No household in the English-speaking world is properly furnished unless it contains copies of the Holy Bible and of The Works Of William Shakespeare. It is not always thought necessary that these books should be read in mature years, but they must be present as symbols of Religion and Culture.
इन पंक्तियों से यह स्पष्ट हो जाता है कि शेक्सपियर का स्थान अंग्रेज़ी विश्व में किस रूप में ग्रहण किया जाता है। वहां उनकी कृतियों को वही आदर और सम्मान मिलता है जो की पवित्र ग्रंथ बाइबल को दिया जाता है और एक घर तब तक सम्पूर्ण नहीं माना जाता जब तक उसमें पवित्र ग्रंथ बाइबल और शेक्सपियर की रचनाएँ उपस्थित न हो भले ही इन कृतियों को पढ़ा न जाए किंतु यह धर्म और संस्कृति के रूप में प्रत्येक घर में अवश्य होनी चाहिए ऐसी श्रद्धा शेक्सपियर हेतु हमें पाश्चात्य समाज में देखने को मिलती है।

विश्व- साहित्य के अद्वितीय नाटककार शेक्सपियर का जन्म 26 अप्रैल, 1564 ई॰ में स्ट्रेटफोर्ड-आन-एवोन नामक स्थान में हुआ। इनके पिता का नाम जॉन शेक्सपियर और माता का नाम मैरी शेक्सपियर था। 1587 ई॰ में शेक्सपियर ने लंदन जाकर नाटक कंपनियों में काम करना शुरू किया जहां से उनकी कला धीरे-धीरे समूचे विश्व में अपना वर्चस्व स्थापित कर गई। शेक्सपियर ने 1612 ई॰ में लिखना छोड़ दिया और 1616 ई॰ में उनका देहांत हो गया और विश्व-साहित्य का पर्याय हमेशा के लिए अलविदा कह गया।
शेक्सपियर ने लगभग-लगभग 36 नाटक लिखे और कुछ कविताएं भी लिखीं। उनके कुछ प्रसिद्ध नाटक हैं- जूलियस सीज़र, ओथेलो, मैकबेथ, हैमलेट, सम्राट लियर, रोमियो जूलियट(दु:खांत), मर्चेन्ट ऑफ वेनिस(वेनिस का सौदागर), ट्वेल्फ्थ नाइट(बारहवीं रात), मच अड़ो अबाउट नथिङ्ग(तिल का ताड़), दी टेम्पेस्ट(तूफ़ान)। इनकी सभी रचनाएँ सुप्रसिद्ध हैं जिनको किसी के परिचय की आवश्यकता नहीं है। शेक्सपियर के द्वारा लिखी गई सब त्रासदियाँ अपने आप में एक मील का पत्थर हैं और उनके समान इस क्षेत्र में फिर दुबारा कोई ख्याति प्राप्त ना कर सका। शेक्सपियर के नाटकों के अनुवाद भारतीय साहित्य में कई साहित्यकारों द्वारा किए गए हैं जिस में कुछ जो सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं वह वो अनुवाद हैं जो डॉ॰हरिवंशराय बच्चन, डॉ॰रांगेय राघव और डॉ॰ अमृत राय द्वारा किए गए।
इन तीनों के प्रयासों में सबसे सफल प्रयास यदि देखा जाए तो वह डॉ॰ रांगेय राघव जी का माना जाता है क्योंकि इनके द्वारा किए गए अनुवाद भाषा की सरलता को बनाए रखते हुए पाठक के मस्तिष्क में वही बिम्ब स्थापित करते हैं जो एक मूल रचना को पढ़ने के बाद पाठक अनुकलित करता है जबकि बच्चन जी का अनुवाद काव्यात्मक होने के कारण बहुत से स्थानों पर कुछ कृत्रिम और कुछ भोड़ा सा प्रतीत होता है। यद्यपि उनका काव्यात्मक प्रयास प्रथम प्रयास होने के कारण सराहनीय है। वहीं अमृत राय जी ने भी गद्यात्मक अनुवाद प्रस्तुत किए परंतु उनकी भाषा में भी वह सहज प्रभाव लक्षित नहीं होता जो रांगेय राघव जी द्वारा अनूदित कृतियाँ सहज भाव से कर जाती हैं।
२०वीं शताब्दी के एक महत्वपूर्ण साहित्यकार डॉ॰ रांगेय राघव जी का जन्म उत्तर प्रदेश की प्रसिद्ध ताजनगरी आगरा में १७ जनवरी १९२३ को हुआ। इनका पूरा नाम तिरुमल्ला नंबकम विराराघवन आचार्य था। इन्होने अपने ४० साल के छोटे से जीवन में १३ वर्ष की आयु से ही लिखना शुरू कर दिया था। ४० साल की आयु में ही कैंसर के कारण इनकी मृत्यु हो गई और एक बहुत बड़ा अनुवादक हमारे बीच न रहा। इनके द्वारा किए गए शेक्सपियर के अनुवाद हैं जूलियस सीज़र, ओथेलो, जैसा तुम चाहो(As you like it), तिल का ताड़(Much Ado About Nothing), तूफ़ान(The Tempest), निष्फल प्रेम, परिवर्तन, बारहवीं रात(Twelfth Night), मैकबेथ, वेनिस का सौदागर(Merchant Of Venice), हैमलेट। 

हैमलेट शेक्सपियर का एक अत्यंत दु:खांत नाटक है। यह नाटक उसके रचनाकाल के तीसरे युग की रचना है, जब उसने जूलियस सीज़र, ओथेलो, सम्राट लियर, मैकबेथ, एंटणी एंड क्लियोपैट्रा केरियोलैनेस, टाइमन ऑफ एथेंस नामक नाटक लिखे थे। ऐसा माना जाता है कि हैमलेट की कथा शेक्सपियर के हैमलेट से पूर्व ही लिखी जा चुकी थी। सैक्सोग्रैमैटिक्स की हिस्टोरीय डैविका में यह पेरिस में 1514 ई॰ में छपी थी। कुछ का मत यह भी है कि अंग्रेज़ी में ही हैमलेट नाटक एक पुराना नाटक था जो शेक्सपियर के हैमलेट से पहले खेला जाता था। कुछ विद्वानों का मत है कि शेक्सपियर ने वहाँ से ही अपने नाटक का कथ्य लिया था।
शेक्सपियर का हैमलेट प्रतिहिंसा का दु:खमय अंत नहीं, मानव-आत्मा का दु:खांत है, जिसमें मनुष्य के उदात्ततम गुण संसार की नीचता और कुटिलता से कुचले जाते हैं। मनुष्य जीवन के जो सार्वजनीन सत्य हैमलेट में प्रतिपादित हैं, वैसे अन्यत्र कम ही मिलते हैं। शेक्सपियर का कोई भी नाटक उसके पाठकों पर वह प्रभाव नहीं डाल सका जो प्रभाव हैमलेट ने डाला। इसका नाम विचारों की त्रासदी रखा गया जो की इसके अनुसार बिलकुल ठीक बैठता है। हैमलेट एक ऐसी त्रासदी है जिसमें इसका मुख्य पात्र हैमलेट” निरंतर धोखे खाने के बाद अपना मानसिक संतुलन खो बैठता है। वह उस स्थिति में फंस जाता है जहां वह केवल अपने एक मित्र को छोड़कर किसी पर भी विश्वास नहीं कर सकता और जिन पर वह विश्वास करता है वह भी विश्वासघात कर बैठते हैं। इन सब घटनाओं के परिणामस्वरूप वह अपने आपको पागल दर्शाना आरंभ कर देता है ताकि वह सत्य को सामने ला सके। हैमलेट में बहुत से पात्र हैं जिनके नाम रांगेय राघव जी ने उनके मूल रूप में ही रखे हैं ताकि मौलिकता खंडित न हो और यह अनुवाद के नियमों के अनुसार ठीक भी है।
1.  क्लौडियस
डेनमार्क का सम्राट हैमलेट का चाचा और उसके पिता का खूनी (नाटक का मुख्य खलनायक)
2.  हैमलेट
स्वर्गीय सम्राट का पुत्र तथा क्लौडियस का भतीजा(नाटक का मुख्य पात्र)
3.  पोलोनियस
राजमहल का प्रधान करमचारी और क्लौडियस का चाटुकार ओफीलिया और लेआर्टस का पिता।
4.  लेआर्टस
5.  होरेशिओ
हैमलेट का मित्र
6.  गरट्रयूड
डेनमार्क की सम्राज्ञी और हमलेट की माँ
7.  ओफीलिया
हैमलेट की प्रेमिका जिसे वह प्राप्त नहीं कर पाता

यह कुछ मुख्य पात्र हैं जिनके इर्द गिर्द पूरा कथानक कसा गया है
हैमलेट की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह नाटक नाटक के भीतर एक नाटक है A play within a play। हैमलेट जिसे सब पागल समझते हैं वस्तुतः वह केवल एक ढोंग करता हुआ पूरे नाटक में नज़र आता है जिसे सभी उसका पागलपन समझते हैं किंतु उसका अभिनय इतना वास्तविक होता है कि वह उसके उद्देश्य को पूरा कर ही देता है। हैमलेट जिसे बहुत से विद्वानों ने कायर, डरपोक, कमजोर व्यक्ति की उपाधी दी वह उतना ही चतुर और उद्देश्यलक्षित पुरुष था। कुछ विद्वानों ने हैमलेट के मानसिक-विश्लेषण पर काफी बल दिया जिसमें डॉ॰ एर्न्स्ट जोन्स जी का यह विचार था की हैमलेट ने अपने प्रतिशोध को टाला क्यों; क्या वह सच में पागल था या सिर्फ पागल होने का ढोंग करता था। हैमलेट ने एक कलात्मक अभिनय की उपलब्धि को सम्पन्न किया या निष्पन्न किया। डॉ॰ जोन्स ने अपने यह विचार विभिन्न विद्वानों के मतों के विश्लेषण के पश्चात दुनिया के सामने रखे। अलरिसी ने सन १८३९ में यह विचार सामने रखा की हैमलेट मूल रूप से यह जानता ही नहीं था की प्रतिशोध का नैतिक औचित्य है क्या। उसकी चरित्रगत प्रवृति और बहुत अधिक समर्पित धार्मिक और इसाईयत वाले सिद्धान्त उसको उसके पिता के प्रतिशोध लेने में बाधा बनकर खड़े थे। एक अन्य विद्वान स्टॉल  के अनुसार उसका यह आचरण केवल उसके बौद्धिक होने से संबन्धित था और वह बहुत कटु यथार्थवादी था जो की उसके

पिता के प्रेत पर किसी हालत में विश्वास करने के लिए राज़ी नहीं था और उस प्रेत की संधिग्त्ता ही उसे प्रतिशोध को लेकर दुविधा में डाले थी। वह स्वयं को विश्वास नहीं दिला पा रहा था की प्रेत पर विश्वास किया जाए या नहीं। क्या कारण है की हैमलेट अकेले में किए गए आकाशभाष में अपनी विवशता तो दर्शाता है किंतु उसके दिमाग में क्या चल रहा है खुल के नहीं बताता। उसकी इस दुविधा के निष्कर्ष स्वरूप यही कहा जा सकता है की हैमलेट के अंदर किसी प्रकार की घृणा थी अपने पिता के प्रतिशोध को लेकर जिसे वह स्वयं नहीं पहचान सकता था। हैमलेट के अंदर एक शिशु था जिसे समय की मार ने समय से पहले ही वयस्क बना दिया था और साथ ही उसके पिता को उससे छीन कर अनाथ भी।   उसे जबरन चतुर बनना पड़ा किंतु वह यह ज़िम्मेदारी ढंग से अपने कंधों पर ले ना पाया जिसके कारण वह भयभीत हो उठा। बहादुर वो होता है जिसने जीवन भर जीवन से संघर्ष किया होता है और वो संघर्ष जो दूसरों के साथ किया जाता है किंतु हैमलेट तो इस सब के लिए बना ही नहीं था और जिस घर में ही गला काटने वाला साथ रहे वहाँ भय न होगा तो क्या होगा। यह भय एक समय के बाद उसकी कमजोरी बन गया जो की एक ऐसी घृणा में परिवर्तित हो गई जिसे वह अंत तक स्वयं ही नहीं समझ सका।
हैमलेट जो की १७वीं शताब्दी(१६००-१६०२) के आरंभ में लिखा गया, शेक्सपियर का ऐसा नाटक है जिस पर बहुत से निर्वचनों ने भी जन्म लिया। यह नाटक निर्वचन की दृष्टि से एक ऐसा नाटक है जिस पर यदि चर्चा की जाए तो शायद ही उसका कोई अंत देखने को मिले। साथ ही साथ यह बहुत से रहस्यों को भी उद्घाटित करता है जो की नाटक के बीच ही देखने को मिलते हैं। यहाँ एक रहस्य को मूल नाटक और अनूदित कृति की पंक्तियों के द्वारा समझाने का प्रयास किया जा रहा है-
Act Five, Scene One
FIRST CLOWN : Give me leave; here lies the water; good: here stands the man; it is will he nill he, he goes; mark you that? but if the water come to him and drown him, he drowns not himself. Argal, he that is not guilty of his own death, shortens not his own life.
अनुवाद
पहला विदूषक : नहीं, पहले मेरी बात पूरी हो जाने दो साथी! देखो मानो यहाँ तो पानी है। बहुत अच्छा, और यहाँ आदमी खड़ा है, बहुत अच्छा। अब अगर आदमी पानी के पास जाए और अपने-आपको उसमें डुबो दे, तो इसका मतलब हुआ कि उसने यह काम अपनी इच्छा से किया है। समझे, इस बात को अपनी ध्यान में रखना, लेकिन अगर उसके जाने के बजाय पानी ही स्वयं उसके पास आ जाए और उसे डुबा दे, तो यह उसकी आत्महत्या नहीं होगी। इसका यह तात्पर्य हुआ कि अगर मनुष्य अपनी इच्छा से अपनी हत्या नहीं करता है तो उस पर यह दोष नहीं लगाया जा सकता कि उसने किसी तरह आत्महत्या की है। समझे?
इन पंक्तियों में हो रहे रहस्य के उदघाटन को साफ-साफ देखा जा सकता है यह संवाद उस समय का है जब पहला विदूषक दूसरे विदूषक को ओफीलिया की कब्र खोदते समय उसकी आत्महत्या के संदर्भ में समझा रहा था। उसके शब्द इस तथ्य को सोचने पर विवश कर देते हैं कि ओफीलिया की मृत्यु आत्महत्या थी या वह एक हत्या थी। यदि इसे एक साज़िश कहा जाए तो यह षड्यंत्र किसने रचा था? केवल एक ही व्यक्ति था जिसे ओफीलिया की मृत्यु से कोई लाभ हो सकता था और वह था सम्राट। नाटक में जिस तत्व को दर्शाया नहीं गया वह यही था ओफीलिया की मृत्यु उसके भाई को और अधिक प्रतिशोध के लिए उक्साएगी और वह अपने पिता और अपनी बहन का बदला हैमलेट से लेकर ही रहेगा। यह षड्यंत्र केवल सम्राट का ही हो सकता है जिससे यह सिद्ध हो जाता है की ओफीलिया की मृत्यु आत्महत्या नहीं हत्या थी। दूसरी ओर इन पंक्तियों से निर्वचन का भी बोध होता है क्योंकि ओफीलिया की मृत्यु समसामायिक स्तिथियों का ही परिणाम थी जो उसकी आत्महत्या को एक हत्या के रूप में परिवर्तित करती है।
हैमलेट शेक्सपियर की एक ऐसी रचना है जो पाठक एवं दर्शक दोनों को ही संसार की उन घिनौनी वास्तविकताओं से परिचित करती हैं जो ऊपर से तो नहीं दिखती हैं किंतु अंदर ही अंदर मनुष्य को खोखला करती चली जाती हैं। हैमलेट भी ऐसी ही स्थिति का शिकार हुआ एक पात्र है। शेक्सपियर की त्रासदियों का तोड़ तो नहीं है किंतु उनकी रचनाओं में एक बात जो बार-बार किसी न किसी रूप में उभर कर सामने आती है वह है उनकी स्त्री के विरुद्ध लक्षित होने वाली विचार धारा। उनके द्वारा लिखे गए हर नाटक में कहीं न कहीं स्त्री ही मुख्य पात्र के सर्वनाश का कारण बनती है जैसे ओथेलो के सर्वनाश का कारण डेसडिमोना’, मैकबेथ की मृत्यु का कारण लेडी मैकबेथ’, हैमलेट के सर्वनाश का कारण गरट्रयूड उसकी माँ और उसकी प्रेमिका आदि। उनकी स्त्री को लेकर इस विचारधारा पर पहले भी कई चर्चाएँ हो चुकी हैं किंतु इसके पीछे लिप्त विचारधारा को कोई समझ न पाया है। हैमलेट में भी उनके द्वारा एक पंक्ति इस संदर्भ में मिलती है-


Frailty, thy name is women”(Act one, Scene two)
 Means frailty, your second name is women.
अर्थात
Frailty शब्द के कई पर्याय हैं जैसे दोष, निर्बलता, अस्थिरता, भंगुरता आदि किंतु यहाँ इस शब्द को अस्थिरता के रूप में ग्रहण किया गया है क्योंकि हैमलेट की माँ उसके पिता की मृत्यु के पश्चात तुरंत ही उसके चाचा के साथ दूसरा विवाह कर लेती है जिससे हैमलेट को बहुत बड़ा धक्का लगता है कहीं न कहीं इस शब्द को निर्बलता के रूप में भी रखा गया है यदि उसकी माँ की दृष्टि से सोचा जाए तो।

अंत में निष्कर्ष स्वरूप हम यह ही कह सकते हैं की शेक्सपियर की एक-एक कृति अपने भीतर ना जाने क्या-क्या छिपाए हुए है और उनकी भाषा भी अत्यधिक कठिन है एक हिंदी भाषा भाषी के लिए किंतु रांगेय राघव जी द्वारा किया गया हैमलेट का अनुवाद कुछ अपवादों को छोड़कर अनुवाद की कसौटी पर खरा उतरता है यह सरल है, सुग्राह्य है, मूल रचना के बहुत अधिक समीप है, इसमें स्वतंत्रता भी अधिक नहीं ली गई है, भावानुवाद पर विशेष बल दिया गया है, शब्दों के सटीक समतुल्य चुने गए हैं, मूल रचनाकर की कृति को मौलिक सी गति प्रदान की गई है और यह अनूदित कृति पाठक पर मूल कृति की भांति समान प्रभाव डालती नज़र आती है। राघव जी इस प्रकार के नाटकों का अनुवाद केवल एक से दो दिन में कर दिया करते थे वह कौशल यहाँ नज़र भी आता है किंतु क्योंकि जल्दी का काम शैतान का काम होता है तो कुछ त्रुटियाँ भी कहीं कहीं दिखाई देती हैं किंतु इतने अच्छे अनुवाद में उन्हें नज़रअंदाज़ किया जा सकता है। इस नाटक के अनुवाद के माध्यम से इसे अब हिंदी में भी खेला जा सकता है और यह रंगमंचीयता की दृष्टि से भी रचना के साथ पूरा न्याय करता है क्योंकि इसे बड़ी सरलता से रंगमंच पर खेला जा सकता है। यह एक काव्यात्मक कृति का गद्यात्मक अनुवाद होते हुए भी अपनी संप्रेषणीयता कहीं नहीं खोता और यह एक उत्तम गद्यानुवाद का सर्वोच्च उदाहरण है। आज जिस प्रकार अनुवाद का विस्तार हो रहा है उस प्रकार इस विषय को लेकर लोग जागरूक नहीं हैं किंतु यदि डॉ॰ रांगेय राघव जी जैसी दृष्टि रखकर अनुवाद के विद्यार्थी अनुवाद करने का प्रयास करें तो साहित्यिक अनुवाद के क्षेत्र में भी परचम लहराया जा सकता है। हैमलेट का अनुवाद एक सफल अनुवाद है और यह साधारण पाठक तक शेक्सपियर को  मूल नाटक के रूप में ही पहुंचता है। यह तथ्य यह अनुवाद स्वयं ही सिद्ध कर चुका है और इसे किसी प्रकार के प्रमाण की आवश्यकता नहीं है।



Monday, February 9, 2015

                          एस. एम. एस. की भाषा का भाषिक विश्लेषण
                                                                                                              विजय करण
                                                                                  एम .फिल अनुवाद प्रौद्योगिकी
                                                                            Email- kkumar.kumar60@gmail.com
                                             संपर्क:8574768394
भूमिका  -
            उत्तर आधुनिक समय में समाज के प्रत्येक क्षेत्र में बदलाव दिखाई पड़ रहा है ; कला,संस्कृति, विज्ञान आदि क्षेत्रों में बदलाव आ रहे हैं जो आपरिहार्य हैं,और भाषा भी इससे अछूती नहीं है ।  मनुष्य ने शुरूआती समय से ही  अपनी सुविधा के लिए नई नई चीजों का निर्माण करता चला आ रहा है । किंतु समय बिताता गया और एक समय ऐसा आया कि  जब  मनुष्य को लगने लगा कि अब करने के लिए क्या है? लेकिन  मनुष्य की नया करने की प्रकृति आज भी बनी हुई है,  इसका उदाहरण है यह है कि आज वह reconstruction के काम में लगा है,खुद की बनाई गई चीजों को वह तोड़ मरोड़ रहा है और दुनिया के नएं रूप में सामने रख रहा है ।
कुछ यही स्थिति हम भाषा के क्षेत्र में देख  रहें  हैं, जिसमें पहले व्याकरण के नियम बनाए गए थे जिसके अंतर्गत भाषा को सुविधापूर्ण बनाया गया था किंतु नोम चाम्स्की ने इन सभी को तोड़ते हुए नए विचार प्रदान किए एवं  एक नई धारा प्रदान की ।  इसी संदर्भ में आज हम एस. एम. एस.  की बात करें तो एस. एम. एस. ने आज एक नई भाषा का निर्माण किया  है।  जिसका कोई व्याकरण उपलब्ध नहीं है, न ही किसी शब्द कोश में किसी शब्द का अर्थ उपलब्ध है  और न  ही वह शब्द मिलते है ,केवल उपयोगकर्ता को ही एस. एम. एस. की भाषा समझ में आती है ।
यह समाज में नई संस्कृति का निर्माण करती है, साथ ही एस. एम. एस. की भाषा अपने ही समूहों तक मर्यादित होती है जो  अन्य समूहों से दूरी बनाए रखने की लगातार कोशिश करती है ।  किसी भी शब्द को बनाने के लिए संकेतक (signifier)एवं संकेतित (signification)की जरुरत होती है जो क्षेत्रीय स्तर पर अलग अलग होती है वैसे ही शब्दों के उच्चारण के बाद मनुष्य के मस्तिष्क में बनने वाले चित्र अलग अलग होते हैं। उदाहरण के लिए हिंदी के जानने वालों के बीच आकार आलू  के बजाय बटाटा (यह शब्द आलू के लिए मराठी में उपयोग किया  जाता है ) शब्द का उपयोग करें तो वह मराठी भाषा को न जानने के करण उस समूह के मस्तिष्क में कोई आकृति नहीं बनेगी यह एक तरह से अजनबियत को उत्पन्न करता है ।  किंतु अब हम देखते है कि  आज मोबाईल क्रांति के पश्चात  सम्प्रेषण के क्षेत्र में बदलाव आया है न केवल वाचिक बल्कि लिखित रूप (एस.एम.एस.) भी तेजी से व्यवहार में आया है ।  भाषा के सारे नियमों एंव व्याकरण को तोड़ दिया  है ।  जो  हर रोज नए शब्द गढें जाते हैं ।  और आश्चर्य जनक बात यह की इसका कोई रचयिता नहीं है ।  इसे स्वयं उपयोगकर्ता द्वारा बनाया जाता है।  जो अपने उपयोग के लिए ही  है।  इस संदर्भ में न जाने क्यों एस.एम एस. की भाषा मुझे पूरी तरह लोकतान्त्रिक लगने लगती  है । क्योंकि   यही वह  भाषा है जो लोगों ने लोगों द्वारा एवं लोगों के लिए है अन्यथा आज तक हम देखते है की हर क्षेत्र में विशेषीकरण (specialization)होने के कारण उस क्षेत्र के विद्वान, विशेषज्ञ एवं बुद्धिजीवी अपने विचारों एवं शोध द्वारा प्राप्त तथ्यों  को लोगों पर थोपते रहते हैं , एक एस.एम.एस. की भाषा एक ऐसा क्षेत्र है, जो पूरी तरह आम लोगों द्वारा बनाया गया है जिसका संचालन पूरी तरह  आज भी उनके हाथों में है ।
  शायद आने वाला कल याइसके विशेषज्ञ इसका पेटेंट भी अपने नाम करवाएं किंतु आज वर्तमान में एस.एम.एस. की भाषा पूरी तरह स्वतंत्रा को बरक़रार रखते हुए लोगों में नवनिर्मिती  की सोच को बढ़ाने का कम कर रही है जो एक सभ्य समाज में अच्छा परिवर्तन माना जाएगा ।
एस. एम. एस. एक नई  संप्रेषण की प्रणाली है ।  यह हमें मोबाईल एवं पेजर से जोड़ता है। यह सरल मोबाईल एक संचार प्रोटोकाल (communication, protocol) मोबाईल टेलीफोन उपकरणों के बीच लघु सन्देशों का आदान –प्रदान करने की अनुमति प्रदान करता है ।  संप्रेषण एक सहज मानवीय प्रक्रिया है जिसमें एक से अधिक व्यक्ति या दो व्यक्तियों (वक्ता एवं श्रोता ) में रहते हुए किसी सूचना या विचार का  आदान –प्रदान करते हैं  ।  इसमें भाषा आधारभूत साधन का कार्य करती है वक्ता द्वारा सूचना या विचार को भाषिक रूपों (linguistics forms)में बोलकर या लिखकर कोड़ीकृत किया  जाता है और श्रोता उन  उच्चरित या लिखित रूपों को सुनकर या पढ़कर सूचना या विचार को कोड रूप से डिकोड करता है। एस.एम.एस. सीमित शब्दों में संक्षिप्त सन्देश भेजने की मोबाईल कंपनियों  द्वारा प्रदत्त सुविधा है । इसे हिंदी में ‘सरल मोबाईल सन्देश सेवा’ कहा गया है किंतु हमें ‘संक्षिप्त सन्देश सुविधा’ हिंदी रूपांतरण अधिक सटीक जान पड़ता है,  इसमें मोबाईल कंपनियों द्वारा अलग–अलग शब्द सीमा देते हुए चार्ज के रूप में कुछ पैसा लिया जाता है इसमें दैनिक  साप्ताहिक एवं मासिक एस.एम.एस. जैसी सुविधाएँ भी देखी जा सकती है ।
एस. एम. एस. : परिचय  –
एस. एम. एस. एक नई   संप्रेषण की प्रणाली है।यह हमें मोबाइल एवं पेजर से जोड़ता है। यह सरल मोबाइल एक संचार प्रोटोकाल (communication, protocol) मोबाइल टेलीफो नई उपकरणों के बीच लघु सन्देशों का अदानप्रदान करने की अनुमित प्रदान करता है।संप्रेषण एक सहज मानवीय प्रक्रिया है जिसमें एक से अधिक व्यक्ति या दो व्यक्तियों   (वक्ता एवं श्रोता ) में रहते हुए किसी सूचना या विचार का अदानप्रदान करते हैं।
सामान्यतःप्रत्येक व्यक्ति एस.एम.एस. अपनी भाषा में ही लिखता है किन्तु रोमन लिपि जानने वाले लोगों द्वारा प्रायःएस.एम.एस. रोमन लिपि में ही लिखे जाते है। रोमनलिपि के वणों (letters)के सामान्य उच्चारण  (वर्णमाला alphabet में ) और शब्दों में होने वाले उच्चारण के बीच अंतर से हम सभी पररिचत हैं ; जैसे :
वर्ण       वर्णमाला में शब्दों में उदहारण-
              उच्चारण     उच्चारण
A                ए              अ,Dhaka=, Abstract=
B               बी              बlab=
C             सी             , cement= cat=कआदद।
इसी प्रकार अन्य सभी वर्णों को भी देखा जा सकता है। इससे अतिरिक्त प्रत्येक वर्ण के (वर्णमाला में प्राप्त ) सामान्य उच्चारणात्मक स्वरूप के समान कुछ शब्दों का उच्चारण भी होता है। जैसे :
वर्ण  वर्णमाला में       शब्द
       उच्चारण
A            ऐ          a=एक
B            बी        be=hona, bee= मधुमक्खी
C            सी       see= देखना, sea=समुद्र
                                           आदि .......
इसी प्रकार की स्थिति कुछ सांखिकीय वर्णों (numeric characters) में भी पाई जाती ; जैसे 2=two,to,too .आदि
एस.एम.एस लेखन में संक्षिप्तता की महत्ता को देखते हुए रोमन वर्णों की इस विशेषता का लाभ उठाते हुए वर्तमान  SMS लेखन की जो नई पद्धति विकसित हुई है उसमें सामान्य लेखन के नियम धरे के धरे रह गए है ।  अब चूँकि  भाषिक रूप (या सम्पूर्णतः भाषा ) संप्रेषण का मध्यम है और एस.एम.एस. द्वारा हमारे समाज में व्यापक स्तर पर संप्रेषण  हो रहा है अतः इस नवीन संप्रेषणात्मक विधा की संरचना पर भाषा वैज्ञानिक दृष्टि से विचार कार एक नई विश्लेषण प्रणाली का विकास आवश्यक हो जाता है ।
एस. एम. एस. : भारतीय परिदृश्य: -
भारत एक विविधता में अनेकता वाला देश है जहाँ पर बहुत सारी भाषाएँ बोली जाती है जैसे इस उक्ति में कहा गया है –   कोस  –कोस  पर पानी बदले चार कोस  पर बानी ।
इस तरह आज के आधुनिक समय में उससे भी ज्यादा परिवर्तन दिखता है । जिसमें अंग्रेजी भारतीय भाषाओं  पर हावी होने लगी है, हिंदी का हिंग्लिश हो रहा है ।  प्रौद्योगिकी क्रांति के पश्चात  ज्ञान का महत्व बढ़ गया और यह ज्ञान मात्र ज्ञान न रहकर परिचालन का ज्ञान है जो यह जानता है कि  वह ज्ञानी माना जाने लगा है ।
इस तरह से आने वाले बदलाओं  का महत्वपूर्ण कारण मोबाइल है जिसमें संचारक्रांति के बाद महत्वपूर्ण बदलाव आया  है ।  आज अंग्रेजी का उपयोग मराठी हिंदी पंजाबी आदि भाषाओं में लगातार बढ़ता जा रहा है एवं अंग्रेजी में संक्षिप्तिकरण  के कारण आने वाले समय के लिए खतरा बनता दिखाई पड़ रहा है।
जहाँ एस.एम.एस. की बात करें तो लगभग मान्यता प्राप्त सभी भाषाओं में एस.एम.एस. लिखे जा रहे कुछ भाषाओं के एस.एम.एस.निम्न प्रकार  देखे जा सकते है ।
           हिंदी एस.एम.एस.
          मराठी भाषा में एस. एम.एस.-
  भोजपुरी एस.एम.एस. :-
एस. एम. एस. : प्रकार-
१.    रूप के आधार पर
·        पाठ के रूप में
·       कोडीकृत रूप
·       मल्टीमीडिया रूप
२.    भाषा के आधार पर
·         एक भाषिक एस.एम.एस.:
·        हिंदी एस.एम्.एस.:
·       अंग्रेजी एस.एम.एस.
·       प्रादेशिक भाषा में एस.एम.एस.:
·       द्विभाषिक एस.एम.एस.:
·       हिंदी और अंग्रेजी एस.एम.एस. 
·       हिंदी और प्रादेशिक भाषा में एस.एम.एस
·       बहुभाषिक एस एम.एस.
 सामाजिक प्रयोग के आधार पर-
                            सामाजिक प्रयोगों के आधार पर अगर देखा जाये तो बहुत सारे एस.एम.एस.का प्रयोग किया  जाता है।  अगर एन एस.एम.एस. की  गणना की  जाए तो लगभग सैकड़े की  गिनती को पार कर सकते हैं ।  जिसमें जन्म से लेकर मरणोपरांत के एस.एम.एस. का प्रयोग होता है ,तथा तिथि से लेकर बड़े त्योहारों तक एस.एम.एस. शामिल है तथा कुछ ऐसे भी एस.एम.एस.प्रयोग किया  जाता है जो एक सभ्य समाज में नहीं स्वीकार करते हैं; जैसे – adault sms का युवाओं में भरपूर प्रयोग होता है।  मैंने जो कुछ मोबाइल के एस.एम.एस. का  विश्लेषण किया  है जिनमें शुभ –प्रभात शुभ रात्रि, good morning से लेकर good night एवं शुभ कामनाओं के sms ज्यादा प्राप्त हुए है ।  इनके आलावा बहुत सारे एस.एम.एस. है जो निम्नलिखित है –
Love sms- Chahat Teri Pehchan He Meri…
                   Mahobbat Teri Shaan He Meri…
                   Hoke Juda Tujse Kya Reh Paunga…
                   Tu To Aakhir Jaan he Meri…
sad sms- Meri Saansein Sirf Tere Hi Naam Par Chalti Hai,
Meri Aankhein Sirf Tujhe Hi Dekhna Chahti Hai,
Yun To Aur Bhi Dost Kai Hai Mere,
Na Jane Kyu Dil Ko Sirf Teri Hi Yaad Aati Hai

friendship sms - Kuch saalo baad najane kya sama hoga,
Najane kaun dost kaha hoga,
Phir milna hua toh milenge yaadon mein,
Jaise sukhe gulab milte hai kitabon mein
इस प्रकार से बहुत से  ऐसे एस.एम.एस.है  जिनको आप निम्न प्रकार से  देख सकते हैं:-



·         April Fools SMS
·         ASCII SMS
·         Birthday SMS
·         Break up SMS
·         Broken Heart SMS
·         Christmas SMS
·         Cool Decent SMS
·         Diwali SMS
·         Dua SMS
·         Durga Puja SMS
·         Easter SMS
·         Eid Milad SMS
·         Eid SMS
·         Exam SMS
·         Faraz SMS
·         Father's Day SMS
·         Flirt SMS
·         Friendship SMS
·         Funny SMS
·         Get Well Soon SMS
·         Ghazal SMS
·         Good Luck SMS
·         Good Morning SMS
·         Good Night SMS
·         Greetis SMS
·         Hindi Adult SMS
·         Hindi Anniversary SMS
·         Hindi April Fools SMS
·         Hindi ASCII SMS
 एस. एम. एस. लेखन : संक्षिप्त शब्द निर्माण:
                                  आधुनिक समय में इतनी तेजी आई है की  मनुष्य हर क्षेत्र में shortcut से काम चलाना चाहता है चाहे वह कोई भी क्षेत्र हो shortcut अपनाने से नहीं चुकता है ।  अब यही पर ले लिया जाए की एस.एम.एस.खुद अपने आप में संक्षिप्त रूप में होता है । एस.एम.एस. में शब्द अपने सामान्य रूप में नहीं लिखे जाते बल्कि उनका संक्षिप्तीकरण कर दिया जाता है ।   जैसे – 2da= today, gr8= great , 4get= forget,b4= before, ilu = I love you, c = see, sea. Knpr = Kanpur, alld=allahabad, hdbd=hyderabaad, barabar= ‘=’, gaya= gya इत्यादि ।
एस.एम.एस लेखन में शब्दों के संक्षिप्तिकरण में निम्नलिखित प्रक्रियाएँ होती हैं
क.  प्रतिस्थापन (replacement): इसे निम्नलिखित शीर्षकों के अंतर्गत समझा जा सकता है
१.    शब्द के लिए वर्ण (latter for word) रोमन लिपि में अनेक वर्णों (मुख्यतः a,c,e,r,v,t,y,f,u,d,g,x,l,) के उच्चारण की  तरह कुछ शब्दों का उच्चारण भी होता है ।  अतः इन शब्दों के आने पर इनकी जगह उच्चारण साम्य वाले वर्णों को ही रख दिया जाता है जैसे : where are you  = where r u?
                             See you again = c u again.
इस तरह के शब्द और वर्णों की  समानता हिंदी में भी कुछ हद तक पाई जाती है ।  अतः रोमन में लिखते समय इस प्रकार के शब्दों के आने पर केवल उन वर्णों को ही रख दिया जाता है ।  जैसे – वह भी आया =wah v aaya
२.    शब्द के लिए संख्या (number for word) कुछ अंको क उच्चारण भी शब्दों के सामान होता है ।  उन शब्दों के आने पर शब्द की  जगह (अंक या संख्या) रख दिया जाता है।
        I got eight rupees. = igot 8 rupees. 
     He come too late.= he come 2 late
     हिंदी में भी कुछ ऐसे प्रयोग मिल जाते हैं  जैसे :
    Tu kyon nhi aya.= 2 kyo nhi aya.
३.    शब्द के लिए चिन्ह (symbol for word): कुछ शब्दों के लिए एस.एम.एस. में शब्द की  जगह पर उनके लिए निर्धारित चिन्हों का प्रयोग किया  जाता है । 
जैसे : Ram and Shyam are going = Ram & Shyam r going.
हिंदी में भी इस प्रकार के प्रगोग देखे जा सकते हैं  ।
जैसे – Ram aur rohit ne hisaab barabar kiya= Ram aur rohit ne hisaab = kiya
ख.  वर्ण विलोपन (letter Removing): एस.एम.एस. निर्माण के दौरान शब्दों क संक्षिप्तीकरण करते हुए ध्वन्यात्मक प्रखरता और भेद के आधार पर गौण वर्णों को हटाकर केवल मुख्य वर्णों (main/key letters) को रहने दिया जाता है अथवा उनके आरम्भ , मध्य या अंत से कुछ वर्णों को हटाकर उनकी जगह ध्वन्यात्मक साम्य वाली संख्या या चिन्ह को रख दिया जाता है ताकी  शब्द संप्रेषणीय रहे इस प्रक्रिया को वर्ण विलोपन कहते हुए इसके दो प्रकार की ये जा सकते हैं  :
१.    गौण वर्ण विलोपन (removing miner letter): शब्दों को छोटा करने के लिए प्रायः उन वर्णों को शब्द से हटा दिया जाता है जिनके बिना भी बचे वर्णों के मेल से निर्मित शब्द द्वारा अर्थ प्राप्त हो जाए ।  जैसे : he went to Hyderabad and Bangalore.= he went hdbd & bnglr.
हिंदी शब्दों के साथ भी यह प्रक्रिया देखी जा सकती है ।
Vah Hyderabad aur Bangalore gaya.= vah hdbd & bnglr gya.
 जब शब्दों का  संक्षिप्तिकरण किया  जाता  है तो ज्यादातर स्वर को ही विलोपित किया  जाता है चाहे वह  अंग्रेजी का शब्द को हो या फिर हिंदी के शब्द हों  ।  जैसे – Hyderabad = hdbd, gaya में ‘a’ को तथा Bangalore= bnglr में ‘a,o,e’ इत्यादि वर्णों को विलोपित किया  गया है ।
२.    वर्णों की  जगह संख्या का प्रयोग : एस.एम.एस. के लेखन में कुछ शब्दों के निर्माण में उनके मध्य में या आरम्भ में तथा अंत में भी कुछ शब्दों को निकलकर उनकी जगह उच्चारण में सामान संख्या को (या अंक) को रख दिया जाता है : जैसे – go there before night= go there be4 ni8.
I saw fourteen boys= I saw 4teen boys.
हिंदी में भी ऐसे शब्दों का निर्माण होता है ।
Maine charminaar dekha .= maine 4minaar dekha
Maine subh samachar part padha= maine sama4 patra padha .
ग.    संक्षिप्त रूप  (Abbreviation) सामान्य ,प्रचलित और सर्वाधिक आवृति वाले शब्दों के सक्षिप्त रूप (Abbreviation)
                                           Good morning = gm  
                                                   Take care = tc                          
                                                                                             आदि । 
किंतु एस.एम.एस.लेखन में की ए जाने वाले संक्षिप्तीकरण में बड़े अक्षर (capital letter) का प्रयोग तथा उसके साथ डॉट (.) का प्रयोग (जैसे : G.M.) आदि के नियमों का पालन नहीं किया  जाता ।
एस.एम.एस. लेखन में शब्द संखिप्तिकरण में सामान्यतः प्रयुक्त होने वाले अंक , प्रतीक  तथा संक्षिप्त रूप और इनके द्वारा संकेतित सामान्य शब्द (या विस्तार) इनकी सूची निम्न प्रकार है :
हिंदी शब्दों का शब्द संक्षिप्त :


S=  से
B=  भी
H=  है
Dr =  डर
Tavir = तस्वीर
Prm = प्रेम
Kr = कर
Mn = मन
1,7= एक साथ
Mbil= मोबाइल
Dl = दिल
Rni = रानी
Chnd= चाँद
Stre = सितारे
Sbh = शुभ
मराठी में शब्द संक्षिप्त:-
1kch= एकाचे
Tr = तर
Vr = वर
1kte = एकटे
J1= जेवण
A= ये
T= ती
Jat = जात
3 ने = तीने
8,1= आठवण
2= तू
1da= एकदा
Kute= कुठे
Ami= आम्ही
Ete= इथे 
अंग्रेजी शब्द संक्षिप्त :-
1dRfl    -          wonderful
        2          -          to/too/two
        2dA      -
          today
        2moro  -
            tomorrow
        2nite     -
         to night
       GR8     -           "Great"
        4          -          for

व्याकरण के नियमों का अतिक्रमण:-
जब किसी भाषा की संरचना में कोई परिवर्तन हो या फिर शब्द निर्माण की प्रकिया हो, इन सारे परिवर्तनों में व्याकरण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है ।  यह परिवर्तन उसी भाषा के व्याकरण के अनुसार होता है ।  यदि भाषा के शब्द निर्माण की प्रक्रिया पर विचार करें तो भाषा में शब्द निर्माण की प्रक्रिया कई ढंग से होती है ।  कभी उपसर्ग लगाकर, कभी प्रत्यय लगाकर, कभी दो शब्दों के मेल से आदि कई प्रकार से शब्द का निर्माण हम कर सकते हैं।   हिन्दी भाषा की शब्द संरचना की प्रकिया कुछ इस प्रकार से देखी जा सकती है :-
 धातु + प्रत्यय = शब्द
 धातु + उपसर्ग = शब्द
 धातु + मध्य प्रत्यय = शब्द
 हिन्दी भाषा की शब्द निर्माण प्रक्रिया में –
 पढ़ + आई = पढ़ाई
 प्र + भाव = प्रभाव
इसी प्रकार अन्य भाषाओँ में भी शब्दों का निर्माण किया जाता है  जबकि एस.एम.एस. की भाषा इस प्रकार से शब्दों का निर्माण नहीं  किया जाता बल्कि एस.एम.एस. भाषा में कुछ विशेष प्रकार से शब्दों का निर्माण किया जाता है ।  शब्दों को संक्षिप्त करके नए शब्द का निर्माण किया जाता है या अंकों के संयोग से और विशेष सिम्बलों से शब्दों का निर्माण होता है; जैसे - S=  से , Ami= आम्ही , Ete= इथे ,8,1= आठवण , 1,7= एक साथ
इन शब्दों के निर्माण में न कोई व्याकरण है, न ही कोई व्याकरणिक नियम लागू होता है ।  किसी भी भाषा के इस तरह से शब्दों का निर्माण एवं शब्द प्रयोग नहीं होता है जिस प्रकार एस.एम.एस. में प्रयोग एवं निर्माण किया जाता है।  इस एस.एम.एस. प्रणाली ऐसे शब्दों का निर्माण नहीं होता है जिससे नए अर्थ का बोध हो जबकि व्याकरण सम्मत तैयार शब्दों से एक नए अर्थ की प्रतीति होती है ।  
संदर्भ सूची:-
1.       Adbola Otemuyiwa, abstract ,The Emergence of new linguistic features in SMS text messages
2.       Beal, Vangie (2011)Text Messaging and Online Chat Abbreviations, Webopedia
3.       Bhattacharya dr. Monali, abstract unveiling the : an analysis of linguistic competence v/s linguistic performance of the general variety of English in India today-the oust for a paradigmatic model
4.       Christian Viard –Gaudin, Abstract, language models for handwritten short message services
5.       Prasad, Dhanji & Bharati, Ranjeet, Research Paper, SMS: New Mode of Communication and its Linguistic Aspect.
6.       Rafi, Muhammad Shaban : SMS Text Analysis: Language, Gender and Current Practices
7.       Sabreena ahmed , abstract , The use of SMS and Language transformation Bangladesh
8.       T R O S B Y , F I N N : SMS, the strange duckling of GSM
 वेबसाइट :
en.wikipedia.org/wiki/SMS
http://www.txt2nite.com/forum/viewtopic.php?t=136
http://en.wikipedia.org/wiki/SMS